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चाणक्य के 100+ सर्वश्रेष्ठ बचन |Chanakya Quotes In Hindi

दोस्तो आज की इस पोस्ट में आपको आचार्य चाणक्य के 100+ अनमोल विचारो के बारे में बताने जा रहा हूँ। अगर आप इस पोस्ट को ध्यान से पढ़ते है। तो इस पोस्ट को पढ़ने के बाद में आपकी जिंदगी में काफ़ी बदलाव ओर सुधार आयेंगे , और अगर आपने इनकी चाणक्य नीति को अच्छे से समझ लेते है। और इस पोस्ट में बताए गए चाणक्य के सभी विचारो को अपने ऊपर नियमित कर लेते है। तो आपको एक महान व्यक्ति बनने से कोई नही रोक सकेगा ये मेरा दावा है।


तो चलिए अब बिना समय बर्बाद कर हुए जान लेते है जल्दी से चाणक्य के अनमोल बचन।

चाणक्य के 100+ अनमोल बचन


बचपन में संतान को जैसी शिक्षा दी जाती है, उनका विकास उसी प्रकार होता है| इसीलिए माता-पिता का कर्तव्य है कि वे उन्हें ऐसे मार्ग पर चलाएँ, जिससे उनमें उत्तम चरित्र का विकास हो, क्योंकि गुणी व्यक्तियों से ही कुल की शोभा बढ़ती है.


जब आपका बच्चा जवानी की दहलीज पर कदम रखे, यानी कि सोलह-सत्रह वर्ष का होने लगे, तब आप सँभल जाएँ और उसके साथ एक दोस्त की तरह व्यवहार करना बहुत ही जरूरी है।


नदी किनारे स्थित वृक्षों का जीवन अनिश्चित होता है, क्योंकि नंदियाँ बाढ़ के समय अपने किनारे के पेड़ों को उजाड़ देती है. इसी प्रकार दूसरें के घरों में रहनेवाली स्त्री भी किसी समय पतन के मार्ग पर जा सकती है. इसी तरह जिस राजा के पास अच्छी सलाह देनेवाले मंत्री नहीं होते, वह भी बहुत समय तक सुरक्षित नहीं रह सकता. इसमें जरा भी संदेह नही करना चाहिए.


जिस प्रकार सभी पर्वतों पर मणि नहीं मिलती, सभी हाथियों के मस्तक में मोती उत्पन्न नहीं होता, सभी वनों में चंदन का वृक्ष नहीं होता, उसी प्रकार सज्जन पुरुष सभी जगहों पर नहीं मिलते हैं.

चाणक्य बचन


जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हों, ऐसे लोगों से दूर ही रहों ; क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते हैं. जो किसी और का न हुआ, वह भला आपका क्या होगा.


आँख से अंधे को दुनिया नही दिखती, काम के अंधे को विवेक नही दिखता, मद के अंधे को अपने से श्रेष्ट नही दिखता। और स्वार्थी को कहीं भी दोष नही दिखता है।


दूसरों की गलतियों से सीखो/अपने ही ऊपर प्रयोग करके सिखने को तुम्हारी आयु कम पड़ेगी.


जो व्यक्ति अच्छा मित्र नहीं हैं, उस पर तो विश्वास नहीं करना चाहिए; परन्तु इसके साथ ही अच्छे मित्र के सम्बन्ध में भी पूरा विश्वास नहीं करना चाहिए, क्योंकि यदि वह नाराज हो गया तो आपके सारे भेद खोल सकता है।


अगर साँप जहरीला न भी हो तो उसे खुद को जहरीला दिखाना चाहिए


अपने परिवार पर संकट आए तो जमा धन कुरबान कर दें| लेकिन अपनी आत्मा की रक्षा हमें अपने परिवार और धन को भी दाँव पर लगाकर करनी चाहिए.


जो लोग हमेशा दूसरों की बुराई करके खुश होते हों, ऐसे लोगों से दूर ही रहों ; क्योंकि वे कभी भी आपके साथ धोखा कर सकते हैं. जो किसी और का न हुआ, वह भला आपका क्या होगा.


चाणक्य के कोट्स


भोजन के लिए अच्छे प्रदार्थों का उपलब्ध होना, उन्हें पचाने को शक्ति का होना, सुंदर स्त्री के साथ संसर्ग के लिए काम शक्ति का होना, प्रचुन धन के साथ धन देने की इच्छा का होना – ये सभी सुख मनुष्य को बहुत कठिनता से प्राप्त होते है.


काम वासना के समान कोई दूसरा रोग नहीं, मोह के समान कोई दूसरा शत्रु नहीं, क्रोध के समान कोई आग नहीं, ज्ञान से बड़ा कोई सुख नहीं.


कामयाब होने के लिए अच्छे मित्रों की जरूरत होती है और ज्यादा कामयाब होने के लिए अच्छे शत्रुओं की आवश्यकता होती है.


अच्छे कार्य जीवन को महान बनाते हैं| यह मत भूलें कि यह जीवन अस्थायी है इसलिए जीवन के हर क्षण का उपयोग किया जाना जरूरी है. मोत आ जाएगी तो फिर कुछ भी न रहेगा न यह शरीर, न कल्पना, न आशा. हर चीज मोत के साथ दम तोड़ देगी.


दिल में प्यार रखनेवाले लोगों को दुःख ही झेलने पड़ते है. दिल में प्यार पनपने पर बहुत सुख महसूस होता है, मगर इस सुख के साथ एक डर भी अंदर-ही-अंदर पनपने लगता है – खोने का डर, अधिकार कम होने का डर आदि. मगर दिल से प्यार पनपे नहीं, ऐसा तो हो नहीं सकता| तो प्यार पनपे, मगर कुछ समझदारी के साथ. संछेप में कहें तो प्रीति में चालाकी रखनेवाले ही अतत: सुख पाते हैं.


ऐसा पैसा, जो बहुत तकलीफ के बाद मिले, अपना धर्म-ईमान छोड़ने पर मिले या दुश्मनों की चापलूसी से, उनकी सत्ता स्वीकारने से मिले, उसे स्वीकार नहीं करना चाहिए.


अगर कोई व्यक्ति कमजोर है, तब भी उसे हर समय अपनी कमजोरी का प्रदर्शन नहीं करना चाहिए


हमें भूतकाल के बारे में पछतावा नहीं करना चाहिए, न ही भविष्य के बारे में चिंतित होना चाहिए. विवेकवान व्यक्ति हमेशा वर्तमान में जीते हैं. चाणक्य के अनमोल बचन हिंदी में ।


हे बुद्धिमान लोगो ! अपना धन उन्हीं को दो, जो उसके योग्य हों और किसी को नहीं. बादलों के द्वारा लिया गया समुन्द्र का जल हमेशा मीठा होता है.

आचार्य चाणक्य के अनमोल विचार

निर्बल राजा को तत्काल संधि करनी चाहिए।


पडोसी राज्यों से सन्धियां तथा पारस्परिक व्यवहार का आदान-प्रदान और संबंध विच्छेद आदि का निर्वाह मंत्रिमंडल करता है।


निकट के राज्य स्वभाव से शत्रु हो जाते है


एक बिगडैल गाय सौ कुत्तों से भी ज्यादा श्रेष्ठ है अर्थात एक विपरीत स्वभाव का परम हितैषी व्यक्ति, उन सौ से श्रेष्ठ है जो आपकी चापलूसी करते हैं|


सिंह भूखा होने पर भी तिनका नहीं खाता।


चाणक्य के अनमोल बचन और कोट्स हिंदी में


मित्रों के संग्रह से बल प्राप्त होता है। जो धैर्यवान नहीं है, उसका न वर्तमान है न भविष्य।


विद्या ही निर्धन का धन है। विद्या को चोर भी चुरा नहीं सकता।


किसी लक्ष्य की सिद्धि में कभी भी किसी भी शत्रु का साथ न करें।


संतुलित दिमाग से बढकर कोई सादगी नहीं है, संतोष जैसा कोई सुख नहीं है, लोभ जैसी कोई बीमारी नहीं है और दया जैसा कोई पुण्य नहीं है.


वह, जो अपने परिवार से अत्यधिक जुड़ा हुआ है, उसे भय और चिंता का सामना करना पड़ता है; क्योंकि सभी दुखों की जड़ लगाव है इसलिए खुश रहने के लिए लगाव छोड़ देना चाहिए.


जो मित्र आपके सामने चिकनी-चुपड़ी बातें करता हो और पीठ पीछे आपके कार्य को बिगाड़ देता हो, उसे त्याग देने में ही भलाई है. वह उस बरतन के समान है, जिसके ऊपर के हिस्से में दूध लगा है, परन्तु अंदर विष भरा हुआ है.


वही गृहस्थ सुखी है, जिसकी संतान उनकी आज्ञा का पालन करती है| पिता का भी कर्तव्य है कि वह पुत्रों का पालन-पोषण अच्छी तरह से करे।


ऐसी व्यक्ति को मित्र नही कहा जा सकता है, जिस पर विश्वास नहीं किया जा सके और ऐसी पत्नी व्यर्थ है, जिससे किसी प्रकार का सुख प्राप्त न हो.


वह चीज जो दूर दिखाई देती है, जो असंभव दिखाई देती है, जो हमारी पहुच से बहार दिखाई देती है, वह भी आसानी से हासिल हो सकती है यदि हम मेहनत करते है, क्योंकि मेहनत से बढ़कर कुछ नहीं।


आचार्य चाणक्य के अनुसार शेर से 1 बात सीखे, बगुले से 1, मुर्गे से 4, कौवे से 5, कुत्ते से 4 और गधे से 3 बाते सीखें:


भविष्य में आनी वाली मुसीबतो से बचने के लिए धन इकट्ठा करना चाहिए, यहां तक कि अमीरों को भी, क्योंकि जब धन साथ छोड़ता है तो संगठित धन भी तेज़ी से घटने लगता है।


हर चीज़ की ‘अति’ बुरी होती है, क्योंकि आत्याधिक सुंदरता के कारन सीताहरण हुआ, अत्यंत घमंड के कारन रावन का अंत हुआ, अत्यधिक दान देने के कारन रजा बाली को बंधन में बंधना पड़ा, अतः सर्वत्र अति को त्यागना चाहिए।
चाणक्य के अनमोल बचन जिनको पढ़कर ज़िन्दगी बदल जाएगी।


यदि आप पर मुसीबत आती नहीं है तो उससे सावधान रहे। लेकिन यदि मुसीबत आ जाती है तो किसी भी तरह उससे छुटकारा पाए।


हमें दुसरो से जो मदद प्राप्त हुई है उसे हमें लौटना चाहिए. उसी प्रकार यदि किसीने हमसे यदि दुष्टता की है तो हमें भी उससे दुष्टता करनी चाहिए. ऐसा करने में कोई पाप नहीं है।


एक समझदार व्यक्ति को कभी ऐसी जगह नही जाना चाहिए जहां:
– रोज़गार कमाने का कोई साधन ना हो,
– लोगो को किसी बात का डर ना हो,
– लोगो को किसी बात की शर्म ना हो,
– जहां बुद्धिमान लोग ना हो,
– और जहां के लोग दान धर्म करना ना जानते हों।


विद्या अर्जन करना यह एक कामधेनु के समान है जो हर मौसम में अमृत प्रदान करती है। वह विदेश में माता के समान रक्षक अवं हितकारी होती है। इसीलिए विद्या को एक गुप्त धन कहा जाता है।




अच्छा आचरण दुःख को मिटाता है.
विवेक अज्ञान को नष्ट करता है.
जानकारी भय को समाप्त करती है.


चाणक्य नीति के बचन और थॉट्स


वासना के समान दुष्कर कोई रोग नहीं,
मोह के समान कोई शत्रु नहीं,
क्रोध के समान अग्नि नहीं,
स्वरुप ज्ञान के समान कोई बोध नहीं।
चाणक्य के अनमोल बचन


एक संयमित मन के समान कोई तप नहीं,
संतोष के समान कोई सुख नहीं,
लोभ के समान कोई रोग नहीं,
दया के समान कोई गुण नहीं।


ऐसे लोगों से बचना चाहिए जो आपके मुह पर तो मीठी बातें करते हैं, पर आपकी पीठ पीछे आपको बर्बाद करने की योजना बनाते है, ऐसा करने वाले ज़हर के उस घड़े के समान है जिसकी उपरी सतह दूध से भरी है, पर अंदर जह़र ही ज़हर है।


सबसे ज्यादा दुखदाई बात किसी दूसरे के घर जाकर उसका अहसान लेना है।


अपने व्यवहार में बहुत सीधे ना रहे। आप यदि वन जाकर देखते है तो पायेंगे की जो पेड़ सीधे उगे उन्हें काट लिया गया और जो पेड़ आड़े तिरछे है वो खड़े है। ( मतलब कि लोगों को अपना गलत इस्तेमाल करने ना दें, उन्हें जवाब देना सीखें।)


जो जन्म से अंधें हैं वो देख नहीं सकते। उसी तरह जो वासना के अधीन है वो भी देख नहीं सकते। घमंडी व्यक्ति को कभी ऐसा नहीं लगता की वह कुछ बुरा कर रहा है। और जो पैसे के पीछे पड़े है उनको उनके कामों में कोई बुराई नही दिखाई देती।


रिश्तेदारों की परख तब करें जब आप किसी मुसीबत में घिरे हों।


पुत्र वही है जो पिता का कहना मानें, पिता वही है जो पुत्रों का पालन-पोषण करे, और पत्नी वही है जिससे सुख प्राप्त हो।


आपको कभी भी अपना कोई राज़ किसी भी दोस्त को नही बताना चाहिए, क्योंकि एक पक्का दोस्त भी नाराज़ होने पर आपके सारे राज़ खोल सकता है।


लाड-प्यार से बच्चों मे गलत आदते ढलती है, उन्हें कड़ी शिक्षा देने से वे अच्छी आदते सीखते है, इसलिए बच्चों को जरुरत पड़ने पर फिटकारें, ज्यादा लाड ना करें।


जिस प्रकार केवल एक सुखा हुआ जलता पेड़ पूरे जंगल को जला देता है उसी प्रकार एक ही कुपुत्र सरे कुल के मान, मर्यादा और प्रतिष्ठा को नष्ट कर देता है


पांच साल तक पुत्र को लाड एवं प्यार से पालन करना चाहिए। दस साल तक उसे छड़ी की मार से डराए। लेकिन इसके बाद उससे मित्र के समान वयवहार करे। क्योंकि आपके बालिग पुत्र ही आपके और आप उसके सबसे अच्छे मित्र होते हैं।


एक ऐसा बालक जो जन्मते वक़्त मृत था। एक मुर्ख दीर्घायु बालक से बेहतर है। पहला बालक तो एक क्षण के लिए दुःख देता है। दूसरा बालक उसके माँ बाप को जिंदगी भर दुःख की अग्नि में जलाता है।


हम अपना हर कदम फूक फूक कर रखे. हम वही काम करे जिसके बारे हम सावधानीपुर्वक सोच चुके है.


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तो दोस्तो में उम्मीद करता हु , कि आपको चाणक्य की ये अनमोल ओर प्यारी कोट्स ओर बचन पसंद आये होंगे। अगर अच्छे लगे हो तो कमेंट बॉक्स में बताए । और साथ मे शेयर भी कर दे ।